वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक लंबे समय से पारित नहीं हो पाया है। लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों के इस विधेयक के समर्थन में आने के बाद अब इसके संसद के मॉनसून सत्र में पारित होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अगर यह विधेयक पारित होता है तो कई उद्योगों और कंपनियों को इससे फायदा होगा। खासकर असंगठित क्षेत्र के दबदबे वाले उद्योगों की चांदी हो जाएगी क्योंकि जीएसटी विधेयक कर दरों में अंतर पाटने का काम करेगा और कर अनुपालन बढ़ेगा।
जीएसटी विधेयक को लेकर बंधी उम्मीदों के बीच लॉजिस्टिक और रियल्टी क्षेत्र की कुछ कंपनियों के शेयरों में उछाल आई है। जीएसटी विधेयक के पारित होने के बाद इसके लागू होने की तिथि और कर दरों के बारे में ज्यादा स्पष्टïता सामने आएगी। हालांकि इसके प्रावधानों को देखते हुए ऑटोमाबाइल, ऑटो कलपुर्जा उद्योग, उपभोक्ता सामान, रोजमर्रा का सामान, खुदरा और लॉजिस्टिक के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और भवन निर्माण सामग्री जैसे सेक्टरों को फायदा हो सकता है।
लॉजिस्टिक क्षेत्र को जीएसटी से सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। सेंट्रम इन्फ्रास्ट्रचर एडवाइजरी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी संदीप उपाध्याय कहते हैं कि लॉजिस्टिक सेवा देने वाली कंपनियों को जीएसटी से फायदा होगा जबकि टोल ऑपरेटरों को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है। लॉजिस्टिक सेवाएं बढ़ेंगी तो इससे यातायात में इजाफा होगा। गति, अलकार्गो लॉजिस्टिक्स, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और वीआरएल लॉजिस्टिक्स जैसी लॉजिस्टिक कंपनियों के शेयरों में हाल में उछाल आई है और आने वाले दिनों में उन्हें और फायदा होने की उम्मीद है।
विश्लेषकों के मुताबिक दो पहिया वाहन, छोटी कार और व्यावसायिक वाहन बनाने वाली कंपनियों जैसे मारुति, बजाज ऑटो, हीरो मोटरकॉर्प, टीवीएस मोटर, अशोक लीलेंड, टाटा मोटर्स और आयशर को भारी फायदा होगा जबकि महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को कर में केवल पांच प्रतिशत का फायदा हो सकता है। पीवीआर और आईनोक्स लीजर जैसी कंपनियों पर जीएसटी का मिलाजुला असर होगा। अभी 22 प्रतिशत मनोरंजन कर देने वाली पीवीआर को फायदा होगा जबकि 18 प्रतिशत कर दे रही आईनोक्स के लिए जीएसटी नफानुकसान का सौदा नहीं होगा।
आईडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जीएसटी के तहत मल्टीप्लेक्स कंपनियों का लाभ 100 से 200 आधार अंक तक सुधर सकता है। हैथवे, डेन केबल आदि केबल कंपनियों को अभी 25 प्रतिशत कर चुकाना पड़ रहा है जबकि डिश टीवी जैसी डायरेक्ट टु होम कंपनियों के मामले में यह 23 प्रतिशत है। ऐसे में जीएसटी की कम दर इन कंपनियों के लिए सकारात्मक होगी।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने 3 जून के अपने एक नोट में कहा कि जीएसटी आने के बाद दूरसंचार उपभोक्ताओं को ज्यादा कर देना होगा। फोन बिल पर अभी 15 प्रतिशत सेवा कर लगता है लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह 18 प्रतिशत हो जाएगा। जीएसटी का तंबाकू कंपनियों पर प्रभाव अभी साफ नहीं है क्योंकि तंबाकू पर कर की दर अभी स्पष्टï नहीं है। अगर यह दर ज्यादा रहती है तो तंबाकू कंपनियों को नुकसान होगा क्योंकि हाल के वर्षों में केंद्र और राज्यों ने तंबाकू उत्पादों पर कर में भारी बढ़ोतरी की है।