सीमेंट और भवन निर्माण सामग्री की मांग मॉनसून के बाद बढऩे की उम्मीद की जा रही है और ऐसे में जीएसटी इन कंपनियों के लिए राहत का सबब बन सकता है। फिलहाल ये कंपनियां वैट और उत्पाद शुल्क सहित 24.5 प्रतिशत कर दे रही हैं। जीएसटी के तहत यह दर 18 प्रतिशत होगी। जिन इलाकों में मांग कम है वहां इसका फायदा अंतरिम तौर पर उपभोक्ताओं को पहुंच सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अल्ट्राट्रेक को सबसे ज्यादा लाभ होगा क्योंकि उसकी पूरे भारत में मौजूदगी है। साथ ही दूसरी कंपनियां भी लाभांवित होंगी।
सिरैमिक्स और रंग रोगन जैसी भवन निर्माण सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भी जीएसटी फायदे का सौदा साबित होने जा रहा है। टाइल बनाने वाली अग्रणी कंपनियों कजारिया सिरामिक्स और सोमानी सिरामिक्स को एलएनजी की कीमतें कम होने से भरपूर फायदा होने की उम्मीद है और जीएसटी लागू होने के बाद वे बाजार के बड़े हिस्से पर कब्जा करने की स्थिति में होंगी। अभी इस पर असंगठित क्षेत्र की कंपनियों का दबदबा है जो कम कर देती हैं। एमके रिसर्च के मुताबिक एशियन पेंटï्स, बर्जर, हैवल्स, पिडिलाइट जैसी कंपनियों के साथ उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोलगेट, जीएसके कन्ज्यूमर, नेस्ले, डाबर, इमामी, मैरिको, गोदरेज कन्ज्यूमर आदि को भी अप्रत्यक्ष करों में कमी का फायदा होगा।
पेंट कंपनियों और कन्ज्यूमर कंपनियों को अभी कुल 22-23 प्रतिशत कर देना पड़ रहा है जबकि जीएसटी लागू होने के बाद उन्हें केवल 18 प्रतिशत कर देना होगा। क्रिसिल रिसर्च के आंकलन के मुताबिक जीएसटी का सबसे ज्यादा फायदा कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को होगा। मौजूदा 7-8 प्रतिशत की बिक्री के स्तर पर उन्हें लॉजिस्टिक लागत में करीब 30 प्रतिशत की बचत होगी। एफएमसीजी और दवा निर्माता कंपनियों को इसमें 15-20 प्रतिशत का फायदा होगा।
एडलवाइस सिक्योरिटीज के अबनीश रॉय ने कहा, 'एफएमसीजी में से एशियन पेंट्स, बर्जर, पिडिलाइट, एचयूएल और कोलगेट को फायदा होगा।' ऑटो क्षेत्र में अभी दो पहिया वाहनों, छोटी कारों और व्यावसायिक वाहनों पर 26 प्रतिशत और मध्यम आकार की कारों तथा एचयूवी पर 35 से 45 प्रतिशत तक का कर लगता है।