भारत तेल क्रेता की जगह निवेशक बना! यह उन लोगों के मुंह पर तमाचा है, जो पेट्रो-कीमत के लिए मोदी सरकार को घेर रहे थे lभारत UAE से अभी तक कच्चा तेल खरीदता था, लेकिन अब भारत एक निवेशक के रूप में पार्टनर हो गया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की UAE यात्रा ने पांच बड़े समझौते हुए हैं। सबसे बड़ा समझौता यह है कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों के लिए निवेश का रास्ता खुला और भारत UAE का प्रमुख तेल पार्टनल बनकर उभरा है।
यह उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो कहा करते थे कि कच्चे तेल का दाम गिरने के बावजूद सरकार तेल का दाम क्यों कम नहीं कर रही है ! दरअसल कांग्रेस के काल में तेल Rs.72 लीटर था, लेकिन तीनों सरकारी तेल कंपनियों पर 1 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज था और कंपनियां घाटे में थी। मोदी सरकार के समय भी तेल की कीमत उतनी ही है, लेकिन तीनों कंपनियां घाटे से उबर चुकी है, अब एक रुपये का उन पर कर्ज नहीं है, इसलिए मजबूत हुई हैं और अब अरब में निवेश करने की ताकत हासिल कर चुकी हैं।
सोचिए, यदि हमारा आपका एक लीटर पर 10-20 बच भी जाता तो क्या हम उसका सदुपयोग कर पाते? लेकिन आपका-हमारा वही धन आज भारत की सरकारी तेल कंपनियों को विश्व के स्तर पर ताकतवर बना चुका है। जिनके लिए देश पहले है, वो इस खबर से खुश होंगे। और जिनके लिए कांग्रेसी कल्चर यानी लालच महत्वपूर्ण है, वो विधवा विलाप चालू रखेंगे!
