

कल मोदी जी के भाषण सुनने के बाद लगभग हम सभी बहुत आक्रोशित, दुखी हुए,मैं भी आप सभी के साथ तीखी प्रतिक्रया दिया और 5 पोस्ट उड़ेल दिया ! पर आज सुबह जब यू ट्यूब पर मोदी जी का पूरा भाषण सुना और मनन किया तो लगा की मोदी जी ने जो भी कहा एकदम सही कहा कैसे ......?
दरअसल जहां पर हम सभी की सोच (इसमें बिपक्ष भी शामिल है) रुक जाती है, उसी के आगे मोदी जी सोचना आरम्भ करते है ! अच्छी, आकर्षक पेकिंग किया हुआ माल आसानी से बिकता है, बुरी अनाकर्षक पेकिंग किये हुए मॉल की तुलना में।
जिस ''गाँधी'' जी पर कांग्रेस का एकाधिकार था उसे मोदी जी ने बहुत पहले ही छीन लिया था, कल चरखा चलाकर, अहिंसा का पाठ पढ़ाकर गाँधी रूपी अस्त्र से कांग्रेस को ढेर करते हुए विश्व को बहुत ही अच्छा सन्देश दे दिया ! मोदी जी बार बार गांधी जी की बात क्यों करते है ? जिस व्यक्ति के बारे में वे अच्छी तरह से जानते है कि आज भारत की समस्या की जड़ इस व्यक्ति की ''सार्वभौमिक अव्यवहारिकता'' थी, उसी को हर जगह चिपका रहे है ?
भाई, दुनिया मे गांधी बिकता है और मोदी जी अपने भारत की परिकल्पना के लिये, हर वह चीज़ बेचेंगे जो ज़माने में बिकता है ! इसलिए मोदी जी, महात्मा गांधी की आत्मा को अपने अंदर डाले हुये नज़र आते है ! मतलब पेकिंग में गाँधी जी की फोटो !
भाषण के दौरान ''गाय'' की कहानी सुनाते सुनाते भावुक हो गए, किसके लिए ? हम सनातनियों के लिए ? न, हम तो पहले ही गाय के नाम पर बहुत भावुक है ! ये भावुकता गोहत्यारों के लिए थी, उन्हें अपरोक्ष रूप से मोदी ने बता दिया की गाय का क्या महत्व है मोदी के लिए !
कथित गौरक्षको पर कठोर रुख अपनाया,धमकाया किसके लिए ? हमारे व् आपके लिए ? न , बल्कि इस धमकी से अरब कांट्रियों पर मरहम लगाया ! अरे पेट्रोल और रोजगार तो चाहिए न भारत को ! आप सभी अच्छी तरह से जानते है की दुनिया में मुसलमान कही भी मरे,मारे जाए उसकी प्रतिक्रया पुरे मुस्लिम जगत में महसूस की जाती है !
भारत, अपनी आर्थिक और सामरिक समीकरणों को अभी इतना मजबूत नही कर पाया है कि वे गौ हत्या पर हो रही हत्याओं को के प्रचार को, वैश्विक मंच पर दरकिनार कर सके ! उनको पूरा एहसास है कि विश्व के प्रचार तंत्र पर वमियों, प्रो इस्लामिक और लिबर्ल्स का ही कब्ज़ा है और इनसे कन्फ्रन्ट करने की मोदी जी की अभी स्थिति नही है इसी लिए कथित गौरक्षको पर ''कठोर रुख'' की पेकिंग कर दिया !
दरअसल मोदी जी का पूरा फोकस कश्मीर पर है और पाकिस्तान की टूटन सिन्ध, बलूचिस्तान पर है ! पर यह जितना आसान हम भारतीयों को लगता है, वह उसके विपरीत उतना ही चीन के मारे कठिन होता जा रहा है ! उधर ईरान, बलूचिस्तान के कुछ हिस्से पर नजर गड़ाए बैठा है ! बलूचिस्तान को सिर्फ भारतीय फौज आज़ाद करवा लेगी ? संभव है पर इस सम्भवना को बलवती करने के लिए रसिया,अमेरिका के साथ साथ मुस्लिम देशो को भी साथ रखना होगा !
पर पेकिंग के लेबल में ''अहिंसा परमोधर्मः व् बसुधैब कुटुंबकम'' तो लिखना होगा न !~ दरअसल हम भारतीयों की बदकिस्मती रही है कि हमे भारत के लिये आगे के 15-20 वर्ष को देख कर लिये गये निर्णयों की आदत नही रही है ! हम शुरू से ही आज जो मिल रहा है या कल जो मिलने का वादा किया गया है उसी भवना में जीते और मरते है ! लेकिन हम यह भूल जाते है कि दूरगामी नीतियां अपना निर्माण भावनाओ के आधार पर नही करती !
हमारा यह दुर्भाग्य रहा है कि पिछले 70 वर्षों में भारत ने 50वे के दशक में सिर्फ हैवी इंडस्ट्री की स्थापना के अलावा कोई भी दूरगामी नीतियों का निर्माण और उनका कार्यवानित होते हुए नही देखा है और यही हमारे आगे का कुछ न समझ पाने की उलझन और झलाहट का कारण है ! यह सत्य समझ लीजिए कि यह लोकतंत्र है जिसमे भारत की 70% व्यवस्था राष्ट्रवादिता की धुर विरोधी या फिर तटस्थ है !
बहुसंख्यक सेकुलर जनता आज भी आप-हम राष्ट्रवादियों की विरोधी है ! हम राष्ट्रवादियों को एक सत्य का अभी भी आभास नही है कि भारत एक बार फिर टूटने से, सिर्फ 5 वर्षो से बच गया है ! हम उस बुरी स्थिति में पहुंचा दिया गया था जहाँ, 2014 में सोनिया की UPA की 5 वर्ष की सरकार और आ जाती तो कांग्रेस भारत और हिंदुत्व को अंधेरे में धकेल चुके होते ! ''साम्प्रदाइकor लक्षित हिंसा अधिनियम 2011 याद है ?
अतः ये समझ लीजिये की हम एक नियति से बंध चुके है और मोदी जी वही करेंगे जो उन्होंने देश हित के लिए अपनी समयसारणी के हिसाब से सोंच रखा है ! उनमें पूरी वह माद्दा है जहां वह अपने समर्थकों के कटु वचनों को सुन और समझ सकते है ! मोदी जी, जो कर रहे है करने दीजिये मुझे पूर्ण विश्वास है की मोदी जी भारत-भारतीय के हित के लिए करेंगे !
और हाँ एक बात अच्छी तरह से समझ लीजिये ये ''भारत और भारतीय'' में न तो इस्लाम की जगह है न ही इस्लामियत कटटरता की जगह है ! भारत-भारतीय यानी ''सनातनी'' ! मतलब समझे न, पेकिंग में कुछ और लिखा और माल अंदर क्या है ?